a poem in Hindi-miyaan tiyaan

Tariq Amhed Siddiqui is an independent writer and translator. His writings can be accessed at www.derayat.com

Indian Muslim

Here is an audio rendering of his poem “miyaaN TiyaaN”

http://indianmuslims.in/wp-content/uploads/2012/11/miyan-tiyan.mp3

About Kashif

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One Response to a poem in Hindi-miyaan tiyaan

  1. Kashif says:

    मीयां-टींया
    मीयाँ -टीयाँ कट्टरपंथी
    मीयाँ -टीयाँ पाकिस्तानी
    मीयाँ का मिस्वाक
    मीयाँ की पोशाक
    टोपी-टोंटी ठाक !
    मीयाँ है नापाक

    मीयाँ की हर बात निराली
    उल्टी ओर से उर्दू लिख्खें
    हिंदी को दें गाली
    मूंछ तराशें, रख्खें दाढ़ी
    मुल्ला, हांफिज, कारी
    चेहरे से खूंख्वाफर
    अन्दर से गद्दार
    शक में है किरदार

    कैसे चलती रोज़ी रोटी
    कैसे चलती गाड़ी
    देश छोड़कर जायें खाड़ी
    रकमें भेजें भारी
    चार बीवियां, चौंसठ बच्चे
    खाएं बैठ -बिठारी
    खाएं बैठ बिठारी
    अब तो लगेगी सब पर रोक

    मीयां मांसाहारी को आर्डर हो सरकारी
    कि अब खाएं वे तरकारी
    वरना होगी मारा-मारी
    खाएं वे तरकारी
    वरना, वरना, वरना !

    — तारिक अहमद सिद्दीकी
    1998

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